ज़कात क्या है?
ज़कात इस्लाम में सालाना फ़र्ज़ है: जिस मुसलमान की संपत्ति एक तय न्यूनतम सीमा, यानी निसाब, तक पहुँच जाए, वह उसका एक हिस्सा ज़रूरतमंदों को देता है। ज़कात तब फ़र्ज़ होती है जब इस संपत्ति पर पूरा एक चंद्र वर्ष (हौल) बीत जाए।
सोने का निसाब कितना है?
भारत और पाकिस्तान में आमतौर पर साढ़े सात तोला (लगभग 87.48 ग्राम) सोना निसाब माना जाता है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर 85 ग्राम आम है, और तुर्किये का धार्मिक मामलों का विभाग (दियानत) 80.18 ग्राम मानता है। यह फ़र्क पुराने वज़न के पैमानों को ग्राम में बदलने के तरीके से आता है। कैलकुलेटर डिफ़ॉल्ट रूप से 7.5 तोला लेता है; बाकी मानक भी चुने जा सकते हैं।
कई उलमा चाँदी का निसाब (साढ़े बावन तोला) इस्तेमाल करने की सलाह भी देते हैं, क्योंकि वह कम है। यह कैलकुलेटर सोने का निसाब इस्तेमाल करता है।
ज़कात की दर: 2.5%
सोने और नकद पर ज़कात चालीसवाँ हिस्सा, यानी 2.5% है:
1. सोने की कीमत आज के भाव पर उसके शुद्ध सोने के हिसाब से लगाएँ
2. नकद, बैंक बैलेंस और बचत जोड़ें
3. जो कर्ज़ अभी चुकाने हैं उन्हें घटाएँ
4. बची रकम निसाब से ज़्यादा है तो उसका 2.5% ज़कात है
उदाहरण: अगर आपकी ज़कात योग्य शुद्ध संपत्ति ₹10,00,000 है और यह निसाब से ज़्यादा है, तो ज़कात ₹25,000 होगी।
कैरेट क्यों मायने रखता है?
निसाब शुद्ध सोने में तय होता है, इसलिए गहनों का सिर्फ़ शुद्ध सोना गिना जाता है। 100 ग्राम 22 कैरेट गहनों में लगभग 91.6 ग्राम शुद्ध सोना होता है। कैलकुलेटर हर चीज़ के लिए यह अपने आप गिनता है।
क्या पहने जाने वाले गहनों पर ज़कात है?
इस पर उलमा की राय अलग है। हनफ़ी मसलक के मुताबिक़ सोना हर रूप में, गहनों समेत, ज़कात के दायरे में है, और भारत-पाकिस्तान में ज़्यादातर लोग इसी मसलक को मानते हैं। शाफ़ई, मालिकी और हंबली मसलक आमतौर पर रोज़ पहने जाने वाले गहनों को छूट देते हैं। शक हो तो किसी भरोसेमंद आलिम से पूछें।
ज़कात कब दें?
जब निसाब से ज़्यादा संपत्ति पर एक चंद्र वर्ष बीत जाए। बहुत से लोग रमज़ान में ज़कात देना पसंद करते हैं, लेकिन फ़र्ज़ होने के बाद इसे कभी भी दिया जा सकता है।